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Friday, 12 January 2018

स्वामी विवेकानंद जी के अनमोल विचार


स्वामी विवेकानन्द जी हमेशा सभी वर्गों के लिए प्रेरणा स्रोत रहें हैं इनके में  विचारों में  इतनी शक्ति है कि  मुर्दो में भी जान डाल देती है। स्वामी जी कहते हैं मनुष्य अपने भाग्य का विधाता खुद हैं असीम शक्तियां है कुछ भी कर सकते हैं लेकिन कई लोग भाग्य का रोना रोते बैठ जाते हैं। आप अपने भाग्य खुद लिख सकते हैं।  
स्वामी विवेकानंद जी के अनमोल विचार

जिस समय जिस काम के लिए प्रतिज्ञा करो , ठीक उसी समय पर उसे करना चाहिए , नहीं तो लोगों का विश्वास उठ जाता है। 

आप अपने लक्ष्य को अपनी काबिलियत के स्तर से नीचे न रखे , बल्कि अपने काबिलियत के स्तर को अपने लक्ष्य के जितना बड़ा बनाने की कोशिश करें। 


अच्छा होगा कि  आप कोशिश करें और नाकामयाब हो जाएँ और उससे कुछ सीखें बजाये इसके की आप कुछ करें ही नहीं। 


संभव की सीमा जानने का केवल एक ही तरीका है असंभव से भी आगे निकल जाना। 


पहले हर अच्छी बात का मजाक बनता है , फिर विरोध होता है और फिर उसे स्वीकार कर लिया जाता है। 


किसी मकसद के लिए खड़े हो तो एक पेड़ की तरह , गिरो तो एक बीज की तरह , ताकि दुबारा उगकर उसी 

मकसद के लिए फिर से जंग कर सको। 

एक अच्छे चरित्र का निर्माण हजारों ठोकरें खाने के बाद ही होता है। 


सच्चाई के लिए कुछ भी छोड़ देना चाहिए , पर किसी के लिए भी सच्चाई 

नहीं छोड़ना। 

एक समय आता है , जब मनुष्य अनुभव करता है कि थोड़ी - सी मनुष्य की सेवा करना लाखों जप - ध्यान से कहीं बढ़कर है। 


महानता त्याग करने से ही आती है। 

जिस दिन आपके सामने कोई समस्या न आये, आप यकीन कर सकते हैं कि आप गलत रास्ते पर सफर कर रहे हैं। 
बस वही जीते हैं जो दूसरों के लिए जीते हैं। 

जब तक आप खुद पे विश्वास नहीं करते तब तक आप भगवान पे विश्वास नहीं कर सकते। 


आपकी शक्ति ही आपकी जिंदगी है और कमजोरी आपकी मृत्यु। 


उठो ! जागो ! और जब तक नहीं रुकना तब तक लक्ष्य प्राप्त ना हो जाये। 


सभी शक्तियां आपके अंदर हैं आप सब कुछ और कुछ भी कर सकते हैं। 


जिंदगी में जोखिम उठाना जरूरी है।  जीतने पर आप नेतृत्व कर सकते हैं , हारने की सूरत में दूसरों को दिशा दिखा सकते हैं। 


विश्व एक व्यायाम
शाला है जहाँ हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं। 

जब तक जीना , तब तक सीखना अनुभव ही जगत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक है।  

किसी एक विचार को अपने जीवन का लक्ष्य बनाओ कुविचारों का त्याग कर केवल उसी विचार के बारे में सोचो तुम पाओगे कि सफलता तुम्हारे कदम चुम रही है। 


लगातार पवित्र विचार करते रहें , बुरे संस्कारों को दबाने के लिए एक मात्र समाधान यही है। 


स्वयं में बहुत सी कमियों के बावजूद अगर मैं स्वयं से प्रेम कर सकता हूँ तो फिर दूसरों में थोड़ी बहुत कमियों की वजह से उनसे घृणा कैसे कर सकता हूँ। 


खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है। 


मनुष्य स्वयं अपने भाग्य का निर्माता है। 


सबसे बड़ा धर्म है अपने स्वभाव के प्रति सच्चे होना। स्वयं पर विश्वास करो। 


आप जैसे विचार करेंगे , वैसे आप हो  जायेंगे अगर अपने आपको निर्बल मानेंगे तो आप निर्बल बन जायेंगे और यदि जो आप अपने आपको समर्थ मानेंगे तो आप समर्थ बन जायेंगे। 


जीवन में ज्यादा रिश्ते होना जरूरी नहीं है पर जो रिश्ते हैं उनमें जीवन होना जरुरी है। 

आप अपना अनुभव हमसे साझा  नीचे  कमेंट्स करके कर सकते हैं। अगर कोई कमी रह गई हो तो बेझिझक बता सकते हैं ताकि हमारे भविष्य के पोस्ट बेहतर हो।  आप किसी के बारे में जानना चाहते हैं तो कमेंट्स  में जरूर बताइये कोशिश करेंगे आप तक पहुचाने की।  आखिर में , अगर आपको ये पोस्ट लाभदायक लगा हो तो अपने दोस्तों के साथ इसे शेयर करना ना भूलें। धन्यवाद। जय हिन्द।  ......

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