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Wednesday, 24 January 2018

पैडमैन - सफलता की कहानी

पैडमैन - सफलता की कहानी  

पैडमैन का असली नाम अरुणाचलम मुरुगनंतम है। जिन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। अरुणाचलम मुरुगनंतम ने महिलाओं के लिए पीरियड्स  के दौरान उपयोग किये जाने वाले पैड पर काफी रिसर्च के बाद कम कीमत पर बनाने में सफलता प्राप्त किये। यह पैड पहले से भी मार्केट में उपलब्ध था लेकिन मंहगे होने के कारण अधिकतर गांवों में लोग उपयोग नहीं करते थे , जो  स्वस्थ के दृष्टिकोण से एक बड़ी समस्या थी। यह समस्या का अहसास अनुणाचलम मुरुगनंतम को तब हुआ जब उनकी बीवी को इस समस्या से जूझते हुए देखे और इसका कारण पूछने पर मंहगे होने का पता चला और इसी के साथ पैडमैन का सफर शुरू हुआ इन्ही के वजह से आज अच्छी क़्वालिटी का और कम कीमत पर सैनिटरी पैड उपलब्ध हो पाया , साथ ही लोगो की आजीवका का साधन भी बन गया।


Arunachalam Muruganantham Biography ! अरुणाचलम मुरुगणंतम  बायोग्राफी --

नाम - अरुणाचलम मुरुगनंतम
जन्म - 1962
जन्म स्थान - कोयम्बटूर , तमिलनाडु
माता - पिता  - ए।  वनिता , एस. अरुणाचलम
पत्नी - शान्ति
ऑर्गनाइजेशन - जयश्री इंडस्ट्रीज़
अवार्ड - पद्मश्री

अरुणाचलम मुरुगनंतम का जन्म भारत के तमिलनाडु राज्य के कोयम्बटूर  में सन 1962 में हुआ था।  अरुणाचलम मुरुगनंतम बहुत ही गरीब परिवार में जन्म लिए थे।  जब मुरुगनंतम छोटे थे तभी उनके पिता का सड़क दुर्घटना में निधन हो गया था।  जिसके कारन उनकी माता  ने मजदूरी करके पालन - पोषण किये।  मुरुगनंतम को 14 साल की उम्र में ही स्कूल से निकाल दिया गया था जसिके बाद उन्होंने घर चलाने के लिए कई तरह - तरह की नौकरियां किया।

पैडमैन की शुरुआत --
अरुणाचलम मुरुगनंतम का विवाह शांति नाम की महिला से 1998 में हुई थी। एक दिन अपनी पत्नी को कुछ छुपाकर ले जाते देखा तो उन्हें यह जानने की जिज्ञासा हुई और जब वह बहुत ही ख़राब व गंदे कपड़े देखा। तो मुरुगनंतम समझ गए थे इन कपड़ों का उपयोग पीरियड्स के समय किये थे । वह एक इंटरव्यू में बताये थे इतने गंदे कपडे की मैं अपनी गाड़ी भी उससे साफ़ ना करू इतना गन्दा था। जब अपनी पत्नी से मुरुगनंतम ने पूछा कि मार्केट में मिलने वाले सैनिटरी पैड का इस्तेमाल क्यों नहीं करते तो पता चला की काफी महंगे हैं।

मुरुगनंतम एक दिन मार्केट से सैनिटरी पैड खरीदने गया।  जब पैड को देखा तो उनके अनुमान से प्राइस काफी ज्यादा है। उन्होंने एक पैड घर ले कर चले गए और उन पर रिसर्च करना शुरू कर दिया।

मुरुगनंतम ने ठान लिया था लेकिन सफलता इतने आसानी से मिलने वाली नहीं थी। शुरुआत में सिर्फ पैड बनाने के लिए के लिए मुश्किलों का सामना करना उसमें मटेरियल का स्पेरिमेंट करते रहे। टेस्ट के लिए शुरू में अपने बीवी से सहयोग लिया बाद में उन्होंने ने भी मुँह मोड़ लिया और उनके इस सफर में उनका साथ छोड़ दिया।  फिर मुरुगनंतम ने मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चों का सहयोग लिया कुछ समय के बाद वे भी उनका साथ देने से मना कर दिए। फिर पैड को टेस्ट करने के लिए खुद ने ठान लिया और जानवरों के खून से टेस्ट करने लगे और उसे सायकल के द्वारा भी प्रेशर से टेस्ट करते रहे। इसमें सफलता मिलने के बाद आगे एक और चुनौती उनका इंतज़ार कर रहा था।

सैनिटरी पैड बनाने वाली मशीन की कीमत करोड़ों में थी तो यह एक बहुत ही बड़ी समस्या बन गयी।  लेकिन जिनके ऊपर कुछ करने का जूनून हो उसके लिए ये समस्या छोटी हो गयी और दो सालों तक इसी मशीन के लिए मेहनत करते रहे और सफलता उन्हें आखिरकार मिल ही गई। और कम कीमत पर सैनिटरी नैपकिन बनाने वाली मशीन का अविष्कार कर ही डाला। इसी के साथ जयाश्री इंडस्ट्रीज़ की शुरुआत हुई।

जयाश्री इंडस्ट्रीज़ की स्थापना  Jayaashree Industries 

अरुणांचलम मुरुगनंतम ने सस्ते पैड बनाने वाली मशीन और तकनीक के अपने सुझाव को 2006 में आई आई टी मद्रास के सामने रखा था। जिसके बाद मुरुगनंतम के इस अविष्कार को नेशनल इनोवेशन फॉउंडेशन ग्रासरूट टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन अवार्ड के लिए भेजा गया। हजारों आइडियाज़ में इसका पहला स्थान आया। और यह अवार्ड मिलने के बाद उन्होंने जयाश्री इंडस्ट्रीज की स्थापना किया। जयाश्री इंडस्ट्रीज द्वारा बनाई गई 1300 से ज्यादा मशीनें भारत के 27 राज्यों के अलावा अन्य सात देशों में स्थापित की गई।

मुरुगनंतम के इस अविष्कार को कई कॉर्पोरेट संस्था ने खरीदने की कोशिश की मगर इन्होने इसे बेचने से इंकार कर दिया।

अरुणाचलम मुरुगनंतम भाषण -
अरुणाचलम मुरुगनंतम ने पढाई पूरी नहीं कर पाए लेकिन कई विश्व विख्यात संस्थाओं में भी भाषण दे चुके हैं जिसमें IIM Banglore , IIT Bombay , IIM Ahmedabad और Howard शामिल है।

अरुणाचलम मुरुगनंतम की उपलब्धियां -
अरुणाचलम मुरुगनंतम को भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया है।  मुरुगनंतम टाइम्स ऑफ़ मैगज़ीन द्वारा विश्व के सबसे 100 प्रभावशाली लोगों की सूची में साल 2014 में शामिल किया गया।
मुरुगनंतम की ऊपर कई डॉक्यूमेंट्री भी बनाई गयी है। जिनमें से एक फिल्म 9 फ़रवरी 2018 को सिनेमा घर में देखने को मिलेगा जिसमें पैडमैन के रूप में मुरुगनंतम के रूप में अक्षय कुमार दिखेंगे। 

अरुणाचलम मुरुगनंतम के जीवन पर बन रही फिल्म 
अरुणाचलम मुरुगनंतम की जीवन आसान नहीं था किस तरह गरीब घर में पैदा हुआ और छोटी सी उम्र में स्कूल से निकाल दिया गया।  शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाने के बावजूद भी आज सफलता के शिखर पर बैठे हैं। उन्ही सारी मुश्किलों को एक फिल्म  जरिये आप तक पहुंचाने  के लिए आज फिल्म का सहारा लिया  हैं।  आपसे अनुरोध है। आप भी इनकी फिल्म देखिये और जिंदगी में आगे बढिये। सफलता आपका इंतेज़ार कर रहें हैं।

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