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Friday, 15 December 2017

मैरी कॉम की जीवन परिचय

एक बार जो ठान लेती थी , तो उसे पूरा करके दम लेती थी। यही कारण है कि पांच बार नेशनल चैम्पियनशिप जीतने वाली एक मात्रा वोमेन बॉक्सर हैं। 29 वर्षीय दो बच्चों की मां सबका दिल जीत लिया।  हर भारतीय को   गर्व है उन पर।

                     " जले को राख कहते हैं खून को पसीना कहते हैं,
                        हारकर जो जीत जाये उसे मैरी कॉम कहते हैं। "


मैरी कॉम की जीवन परिचय 

                                   पूरा नाम         -      मांगते चुगनेजंग मैरी कॉम 

                                   जन्म               -     1 मार्च 1983 

                                    जन्म स्थान     -     कन्ग  थेई , मणिपुर , भारत 

                                     माता - पिता    -     मांगते अखम कॉम 
                                                                  मांगते टोपा कॉम 

                                      पति               -       करुँग ओखोलर कॉम 

                                      कोच               -      गोपाल देवांग , एम नरजीत सिंह ,
                                                                   चार्ल्स  एटकिंसन , रोंगमी जोसिया 

                                      प्रोफेशन           -      बॉक्सिंग 

                                       हाई ट              -      1 . 58 m 

                                       वजन               -      51 kg 

                                       निवास             -     इम्फाल , मणिपुर 

                                       बच्चे                -    3 बच्चे 


मैरी कॉम की जीवन परिचय


मैरी कॉम को बचपन से ही एथलीट बनने का शौक था , स्कूल के समय में स्पोर्ट्स में हिस्सा लेती थी। लेकिन कभी बॉक्सिंग में कभी भाग नहीं लिया। सन 1998 में बॉक्सर डिंगको सिंह ने एशियन गेम्स में गोल्ड मैडल जीता ,वे मणिपुर के थे।  इसी जीत और गोल्ड मैडल देखकर मैरी कॉम प्रोत्साहित हुई और बॉक्सिंग में करियर बनाने की ठान ली।  लेकिन पहली चुनौती जो थी वह परिवार वालों को राजी करना। बॉक्सिंग करना उनके पिता को मंजूर नहीं था , वे मुक्केबाजी को महिलाओ के लिए असंगत मानते थे मुक्केबाजी के प्रति मैरी के जूनून के देखकर कई बार आगबगूला हो जाते थे।  लेकिन मैरी के जूनून के आगे उनके पापा काफी मुश्किलों के बाद सहमति प्रदान  की।


मैरी कॉम अपना लक्ष्य बना चुकी थी और उसके लिए कुछ भी करने को तैयार थी। इसलिए परिवार वालों को बताने के पहले से ही ट्रेनिंग शुरू कर दी।जब उन्होंने खुमान लम्पक स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स में लड़कियों को लड़कों से बॉक्सिंग करते देखा तो मेरी स्तब्ध रह गई। इससे उनके सपने और मजबूत हो गए। वे अपने गांव से इम्फाल गई और मणिपुर राज्य के बॉक्सिंग कोच एम.नरजीत सिंह से मिली जो मणिपुर राज्य के बॉक्सिंग कोच थे। मैरी खेल के प्रति बहुत भावुक थी , जल्दी सीखने की ललक होने के कारण जब सेंटर से सब चले जाते तब भी वे देर रात तक प्रैक्टिस करती रहती थी।

मैरी कॉम की कैरियर -

मैरी कॉम बॉक्सिंग के रिंग में उतरने के बाद कभी पीछे पलटकर नहीं देखा। जूनून था सपने को पूरा करने के लिए सफ़र मुश्किल ही था लेकिन मैरी के लिए नामुनकीन नहीं था। मैरी के अंदर अद्दुत प्रतिभा थी।


2001 में मैरी ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपना करियर शुरू किया , इस समय इनकी उम्र 18 साल थी।  सबसे पहले इन्होने अमेरिका में आयोजित AIBA वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशिप , 48 kg वेट कैटेगरी में हिस्सा लिया और यहां सिल्वर मैडल जीता , इसके बाद सन 2002 में तुर्की में आयोजित AIBA वीमेन बॉक्सिंग चैंपियनशिप , 45 kg वेट केटेगरी में विजय रही और उन्होंने गोल्ड मैडल अपने नाम किया।  इसी साल मैरी ने हंगरी में आयोजित "विच कप " में 45 वेट कैटिगरी में भी गोल्ड मैडल जीता।  '

2003 में भारत में आयोजित एशियन वीमेन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में 46 kg वेट केटेगरी में गोल्ड मैडल जीता। इसके बाद नार्वे में आयोजित वीमेन बॉक्सिंग वर्ल्ड कप में एक बार फिर मैरी को गोल्ड मैडल मिला।

2005 में ताइवान में आयोजित एशियन वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशिप 46 kg वेट केटेगरी में मैरी को फिर से गोल्ड मैडल मिला। इसी साल रसिया में AIBA वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियन शिप भी जीती।

2006 में डेनमार्क में आयोजित वीनस वीमेन बॉक्स कप और भारत में आयोजित AIBA वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशिप में जीत हासिल कर गोल्ड मैडल जीता।

2008 में भारत में आयोजित एशियन वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशिप में सिल्वर मैडल जीता। इसके साथ ही AIBA  वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियन चाइना में गोल्ड मैडल जीता।

2009 में वियतनाम में आयोजित एशियन इंडोर गेम्स में मैरी ने गोल्ड मैडल जीता।

2010 में कजाखस्तान में आयोजित एशियन वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशिप में मैरी ने गोल्ड मैडल जीता। इसके साथ ही मैरी ने लगातार पांचवी बार AIBA वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशिप में गोल्ड मैडल जीता। इसी साल मैरी ने एशियन गेम्स में 51 kg वेट केटेगिरी में हिस्सा लेकर ब्रोंज मैडल जीता। 2010 में ही भारत में कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन हुआ था यह ओपनिंग सेरेमनी में विजेंदर सिंह के साथ मैरी कॉम की उपस्थिति रही लेकिन इस गेम्स में वीमेन बॉक्सिंग गेम्स का आयोजन नहीं हुआ।

2011 में चाइना में आयोजित एशियन वीमेन कप 48 वेट केटेगिरी में गोल्ड मैडल जीता।

2012 में मोंगोलिया में आयोजित एशियन वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशिप 51 kg वेट केटेगिरी में गोल्ड मैडल जीता। इस साल लन्दन में आयोजित ओलम्पिक में मेरी को सम्मान मिला, वे  पहली महिला बॉक्सर थी जो ओलम्पिक में क़्वालिफ़ाइड हुई थी। यहां मैरी को 51 kg वेट केटेगिरी में ब्रोंज मैडल मिला था। इसके साथ मैरी तीसरी भारतीय महिला थी ,जिन्हे ओलम्पिक में मैडल मिला था।

2014 में साऊथ कोरिया में आयोजित एशियन गेम्स में वीमेन फ्लाई वेट ( 48 - 52 ) में मैरी कॉम  गोल्ड मैडल जीता और इतिहास रच दिया।

2017 में तीन साल ली लम्बी अंतराल के बाद वियतनाम में आयोजित एशियन बॉक्सिंग चैम्पियनशिप में अपना पांचवां एशियाई गोल्ड मैडल जीता।

मैरी कॉम अवार्ड्स एवं अचीवमेंट्स ( Mary Kom Awards )

2003 में अर्जुन अवार्ड मिला।
2006 में पद्म श्री अवार्ड मिला।
2007 में खेल के सबसे बड़े सम्मान राजीव गाँधी खेल रत्न के लिए नोमिनेट किया गया।
2007 में लिम्का बुक रिकॉर्ड द्वारा पीपल ऑफ़ दी ईयर का सम्मान मिला।
2008 में CNN - IBNएवं रिलायंस इंडस्ट्री द्वारा रियल हॉर्स अवार्ड से सम्मानित किया गया।
2008 में पेप्सी MTV यूथ आइकॉन।
2008 में AIBA द्वारा मैग्निफिसेंट मैरी अवार्ड।
2009 में राजीव गाँधी खेल रत्न दिया गया।
2010 में सहारा स्पोर्ट्स अवार्ड द्वारा स्पोर्ट्सवीमेन ऑफ़ दी ईयर का अवार्ड दिया गया।
2013 में देश के तीसरे बड़े सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।

मैरी कॉम फिल्म ( Mary Kom Film )

2014 में  ओमंग कुमार ने"मैरी कॉम" नाम की फिल्म बनाया जो इन्ही मैरी के जीवन पर आधारित था और इस फिल्म पर मैरी की भूमिका में प्रियंका चोपड़ा थी। इस फिल्म में मैरी के जीवन की वास्तविकता को सहज तरीके से बताया है। यह प्रेरक फिल्म है जो लड़कियों को सपने देखने और पूरा करने की प्रेरणा देती है।  इस फिल्म में उनकी स्ट्रगल को देख सकते हैं।


" किसी को इतना भी ना डराओ की उसका डर ही ख़त्म हो जाये " उनके पूरे जीवन संघर्ष का निचोड़ है।"


Note - आप अपना अनुभव हमसे साझा  नीचे  कमेंट्स करके कर सकते हैं। अगर कोई कमी रह गई हो तो बेझिझक बता सकते हैं ताकि हमारे भविष्य के पोस्ट बेहतर हो।  आप किसी के बारे में जानना चाहते हैं तो कमेंट्स  में जरूर बताइये कोशिश करेंगे आप तक पहुचाने की।  आखिर में , अगर आपको ये पोस्ट लाभदायक लगा हो तो अपने दोस्तों के साथ इसे शेयर करना ना भूलें। धन्यवाद। जय हिन्द।  .......

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