motivational blog, inspirational, goal setting, life coch, etc

Friday, 10 November 2017

स्टीव जॉब्स की जीवनी ! Steve Jobs Biography in Hindi


स्टीव जॉब्स 1970 में माइक्रो कम्प्यूटर की क्रांति के जनक कहलाते हैं। स्वयं की टेक्नोलॉजी  में simplicity  और easy to use जैसे सिद्धांतों के प्रति समर्पित करते हुए उन्होंने कंप्यूटर और मोबाइल जैसी जटिल टेक्नोलॉजी को आम लोगों के पहुंच में ला दिया। Apple किसी पहचान की मोहताज़ नहीं है। आज चाहे किसी के पास मोबाइल फ़ोन या कम्प्यूटर  हो न हो।  लेकिन Apple Company और उनके संस्थापक Steve  Jobs को के बारे में जानता ही है।   उनके द्वारा बनाये गए आईफोन और आईपैड सीरीज़ के स्मार्ट फ़ोनस ने मोबाइल की दुनिया  में क्रांति ला दी है। स्टीव जॉब्स परफेक्शन के प्रति जूनूनी थे इसलिए उनकी 6 व्यवसायों के तीव्र विकास :-पर्सनल कम्प्यूटर , एनिमेटेड मूवी , म्यूजिक , फ़ोन , टेबलेट कम्प्यूटिंग और डिजिटल पब्लिशिंग सतत चलता रहा। 


स्टीव जॉब्स की जीवनी ! Steve Jobs Biography in Hindi


    " जीवन में यदि हमें  सफल होना है  तो किसी का भी इंतज़ार किये बिना ही अकेले चलना सीखना होगा। "

स्टीव जॉब्स की बायोग्राफी (  Biography off Steve Jobs )

स्टीव जॉब्स का जन्म  24 फरवरी  1955 में  सैन फ्रांसिस्को , कैलिफोर्निया में हुआ था।  उनका वास्तविक नाम Steven Paul Jobs था , जो उनको गोद लेने वाले माता - पिता ' क्लारा ' और 'पॉल जॉब्स' से मिला था। उनके वास्तविक माता - पिता ( अब्दुल फतह जनडाली और जोअन कारो  सीबल ) कि  आर्थिक स्थिति बहुत ही ख़राब थी।  वे  ये नहीं चाहते थे कि उनके बच्चे को भी अभावग्रस्त जिंदगी में जीना पड़े। इसलिए उन्होंने स्टीव को एक ऐसे दम्पत्ति को सौंपने का फैसला किया जो उनकी अच्छी परवरिश कर अच्छी शिक्षा दें सकें।

स्टीव को गोद  लेने के पहले जिस जोड़े का चुनाव किया था वे पढ़े - लिखे और अमीर थे , लेकिन अचानक उन्हें लड़के की जगह लड़की को गोद लेने की इच्छा हुई।

इसके बाद स्टीव को पॉल और क्लारा ने गोद लिया।  स्टीव की असली माँ चाहती थी कि उनके बेटे को एक शिक्षित परिवार मिले , लेकिन पॉल जॉब्स एक मशीनिस्ट थे , इसलिए स्टीव का ज्यादातर समय अपने पिता के इलेक्ट्रानिक वर्कशॉप में उनकी मदद करते हुए बितता।  यही माहौल था जिसने उन्हें चीजों को सही रूप में समझा , स्टीव किसी भी चीज़ को तोड़ देते और फिर उसे जोड़ते थे। इससे उनको मज़ा आने लगा । धीरे - धीरे इलेक्ट्रानिक में उनका शौक बन गया। बहुत छोटी सी उम्र में इस इलेक्ट्रॉनिक के फील्ड  में बहुत अच्छी पकड़ बन गई। आगे चलकर इसी फील्ड में व्यवसाय और कैरियर का मार्ग भी बना।

स्टीव जॉब्स यूँ तो होशियार थे पर उन्हें स्कूल जाना पसंद नहीं था। स्कूल में वे अपने शरारती कारनामों और भिन्न- भिन्न प्रयोगों को करने के असामान्य कौशल के लिए प्रसिद्ध थे। दिमाग तेज़ होने के कारण शिक्षकों ने उन्हें समय से पहले ही ऊँची कक्षा में पहुंचाने की बात की पर स्टीव के माता - पिता ने मना कर दिया।

स्टीव जॉब्स की शिक्षा -
प्राथमिक विद्यालय में 4 साल पढ़ने के बाद किसी कारणवश उनके माता-पिता को सैन फ्रांसिस्को के ही दूसरे शहर लॉस ऑल्टो में शिफ्ट होना पड़ा।  यहाँ उनका दाखिला होमस्टीड माध्यमिक विद्यालय में करा दिया।  यही उनकी मुलाकात उसी विद्यालय  में पढ़ रहे  Steve Wozniak से हुई। Wozniak का दिमाग भी काफी तेज़ था और उन्हें इलेक्ट्रॉनिक से बहुत प्यार था शायद इसलिए दोनों में जल्द ही दोस्ती हो गयी। जो आगे चलकर Apple Company में साझेदार भी बने।

हाई - स्कूल की पढाई पूरी होने के पश्चात  Steve  का दाखिला रीड कॉलेज में  हुआ। लेकिन इस कॉलेज की फीस इतनी महंगी थी कि माता - पिता के लिए उसे दे पाना संभव नहीं हो पा रहा है और स्टीव को भी अपने माता - पिता का पैसा यूँ बर्बाद करना अच्छा नहीं लगा।  जिससे उनका मन भी पढाई में नहीं लगा। इसलिए उन्होंने कॉलेज छोड़ दिया।


कॉलेज छोड़ने के बाद Steve ने अपनी रूचि के अनुसार एक कैलीग्राफी ( Calligraphy ) क्लास जाने लगे। यहाँ उन्होने कंप्यूटर में प्रयोग किये जाने वाले विभिन्न प्रकार के टाइप - फेस , फॉन्ट और लेआउट के विषय में सीखा तथा एक से बढ़कर एक नए फॉन्ट्स बनाये।   ये एक ऐसा समय था जब Steve के पास बिलकुल पैसे नहीं थे।  वे अपने दोस्त के कमरे में फर्श पर सोते थे और कोक की खाली बोतलें बेचकर खाना खाते थे। हर रविवार सात मील चलकर हरे कृष्णा मंदिर जाते थे और मुफ्त में पेट भर खाना खाते।

वर्ष 1972 में स्टीव जॉब्स को पहली नौकरी एक वीडियो गेम्स बनाने वाली कंपनी Atari Inc. में मिली। कुछ वर्षों तक काम करने के बाद उनका यहाँ भी मन नहीं लगा और कुछ पैसे इकट्ठा करके वे 1974 में भारत चले गए घूमने। वह भारत अपने दोस्त Daniel Kottke के साथ आये। जो बाद में जाकर एप्पल कम्पनी के एम्प्लाई भी बने। भारत में वे सात महीने रहें और बौद्ध धर्म को पढ़ा और समझा। स्वयं को भीतरी और बाहरी रूप से पूरी तरह बदल लिया।  बड़े बालों वाले स्टीव ने अपने बाल कटवा लिए था परंपरागत भारतीय पोषक पहनने लगे।स्टीव के आध्यात्मिक पूर्ति का स्थान भारत था।

 भारत से 7 महीने के बाद वापस लौटने के पश्चात फिर से Atari Inc. में काम करने लगे।  और अपने माता- पिता के साथ रहने लगे।

Steve Jobs और Steve Wozniak एक बार फिर से अच्छे दोस्त बन गए।  दोनों ने मिलकर काम करने का सोचा। दोनों की रुचि के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक के फील्ड में ही कम्प्यूटर बनाने का फैसला लिया।  1976 में पहला कम्प्यूटर बनाया गया था जिसे एप्पल का नाम दिया। इस कम्प्यूटर को स्टीव अपने पिता के गैराज में बनाया। दोनों ने मिलकर अपना - अपना कुछ सामान बेचकर पैसे इकट्ठे किये और अपने जूनून को हकीकत में बदला।  इस समय स्टीव की उम्र महज़ 21 वर्ष थी।

स्टीव जॉब्स का कहना था कि मुझे खुद के लिए एक निजी कम्प्यूटर की जरूरत महसूस हुई। तब उस समय बाजार में मौजूदा कम्प्यूटर्स को खरीदने में असमर्थ थे और साथ ही ये आकर में बड़े और प्रयोग करने में कठिन थे। आम लोग भी इसे आसानी से प्रयोग नहीं कर सकते थे। इससे मुझे कंप्यूटर बनाने कि प्रेरणा मिली। ताकि लोग आसानी से कम्प्यूटर प्रयोग कर सके। इसके लिए उन्हें इंटेल कंपनी के रिटायर इंजीनियर Mike Markkula से सहयोग राशि प्राप्त हुई।

एप्पल कम्पनी की स्थापना  (Foundation of Apple Company )

आधिकारिक रूप से एप्पल कम्पनी की स्थापना स्टीव और उनके मित्र वोज़नियाक ने 1976 में की। शुरुआत में बनाये गए व्यक्तिगत कम्प्यूटर एप्पल -1  को बेचना था।  इसको पहली बार सैन फ्रांसिस्को के Homebrew Computer Club में पेश किया गया था। Apple कम्प्यूटर को छोटा सस्ता और ज्यादा क्रियाशील ( Functional ) बनाया। उनके टेक्नोलॉजी को लोगों ने इतना पसंद किया कि दोनों ने मिलकर कई लाख डॉलर कमाये। जिसमें $774,000 कमाया उसके 3 साल बाद प्रमोशन हुआ।  Apple-II का, जिसने बिक्री को 700 प्रतिशत बढ़ा दिया और वो हो गया $139 बिलियन।

12 Dec 1980 को पहली बार कम्पनी आईपीओ बाज़ार में उतारा गया।  जिससे एप्पल एक सार्वजनिक कंपनी बन गई। उस समय इसके शेयर की कीमत लगभग 22 डॉलर थी, साथ ही Ford Motors कंपनी बाद एप्पल अपने अपने आईपीओ सबसे अधिक पैसा प्राप्त करने वाली कम्पनी गई थी और यही नहीं एप्पल के इस आईपीओ  विश्व के किसी भी Business से ज्यादा , लगभग तीन सौ व्यक्तियों को रातों ही रात करोड़पति बना दिया।

10 साल में Apple एक जानी मानी कम्पनी बन गयी बिलियन डॉलर्स कमाने लगी लेकिन जैसे ही Apple III और Lisa का प्रमोशन हुआ , लोगों ने इन दोनों को ज्यादा नहीं सराहा। फलस्वरूप कम्पनी को घाटा हुआ, बहुत घाटा। दुर्भाग्य से , इसका जिम्मेदार Steve को ठहराया गया और 17 सिंतम्बर 1985 में ,कम्पनी  के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर  ने स्टीव को कम्पनी से निकाल दिया।

Apple कम्पनी से निकले जाने से स्टीव टूट चुके थे , असफलता उन्हें खाये जा रही थी लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।  उन्होंने सोचा कि इस तरह से हार मान लेने से तो मैं टूट जाऊंगा और मैं कुछ भी नहीं कर पाउँगा , इससे तो बेहतर है कि मैं एक नई शुरुआत कर दूँ। इस वक़्त अगर इनके दिमाग में ये बात नहीं घुसती तो शायद आज हमें  हमारा Steve Jobs नहीं मिलता।

उसके बाद मानों Steve Jobs के भाग्य ही खुल गए। उनकी कम्पनी ने इतने पैसे कमाए की 1986 में स्टीव ने 10 मिलियन डॉलर से एक ग्राफिक्स कम्पनी खरीदी और उसका नाम रखा ' Pixar' ।   इसके बाद स्टीव ने जिंदगी में पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा।  Pixar जब Disney  साथ मिल गया तो इस कम्पनी ने सफलता के सातवें आसमान छू लिया।

1997 में  Apple कम्पनी का घाटा  चल रहा था तो Apple ने 477 मिलियन डॉलर से Next को खरीद लिया और Steve Jobs बन गए Apple के सीईओ। शुरू में उन्होंने एक नई सोच के साथ कम्प्यूटर का उत्पादन करना शुरू किया जिसे "Think Different "का नाम दिया गया।   ये वही समय था जब Apple  अनोखे प्रोडक्ट निकले जैसे iMac , iTune ,Apple Stores ,iPod, iTunes Store iPhone, App Store  और  iPad का निर्माण किया। जॉब्स 1997 में बतौर सीईओ काम थे , तभी 1998 में iMac बाज़ार में आया जो बड़ा बड़ा ही अल्पपारदर्शी 2007 में Apple का पहला मोबाइल फ़ोन निकाला जिसने मोबाइल फ़ोन के बाजार में क्रांति फैला दी। सारे फ़ोन हाथों हाथ बिक गयी और Steve Jobs स्टार बन गए।

मृत्यु  ( Death of Legend )
 स्टीव जॉब्स 2003 में पैनक्रियाटिक कैंसर से ग्रसित हो गए।जुलाई 2004 में उनकी पहली सर्जरी हुई। अप्रैल 2009 में उनकी लीवर ट्रांसप्लांट हुआ।  बीमारी का उपचार सही प्रकार से ना होने कारण उनकी मृत्यु 5 अक्टूबर 2011  को Palo Alto , California  में स्थित उनके घर पर हुआ। इस दुखद अवसर पर Microsoft  और Disney जैसी दिग्गज़ कम्पनियों  ने शोक के साथ - साथ संपूर्ण अमेरिका में शोक मनाया गया।  मृत्यु के वक़्त उनकी आयु मात्र 56 वर्ष थी।

"लीक से हटकर सोचना तथा तकनीक को नए रूप में परिभाषित करना ,उनके प्रबल व्यक्तित्व की विशेषताएं थी। "


आप अपना अनुभव हमसे साझा  नीचे  कमेंट्स करके कर सकते हैं। अगर कोई कमी रह गई हो तो बेझिझक बता सकते हैं ताकि हमारे भविष्य के पोस्ट बेहतर हो।  आप किसी के बारे में जानना चाहते हैं तो कमेंट्स  में जरूर बताइये कोशिश करेंगे आप तक पहुचाने की।  आखिर में , अगर आपको ये पोस्ट लाभदायक लगा हो तो अपने दोस्तों के साथ इसे शेयर करना ना भूलें। धन्यवाद। जय हिन्द।  .......















0 Please Share a Your Opinion.:

Post a Comment

Connect us on social media

Ad

Popular Posts

Translate

Recent Posts

book