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Tuesday, 7 November 2017

धीरूभाई अम्बानी की प्रेरणादायी जीवनी, Dhirubhai Ambani Biography in Hindi


DhiruBhai Ambani - धीरजलाल हीरालाल अम्बानी जो ज़्यादातर धीरूभाई अम्बानी के नाम से जाने जाते हैं। इनका जन्म एक सफल भारतीय व्यवसाय के शक्तिशाली कारोबारी थे।एक बिज़नेस टाइकून थे। इन्होने रिलायंस इंडस्ट्रीज  की शुरुआत 1966 में अपने चहेरे भाई के साथ मुंबई में की। जिस मेह्नत और लगन से तरक्की की है आज उसी के वजह से भारत का हर इंसान का प्रेरणा स्रोत हैं। धीरूभाई अम्बानी जिस चिथड़े जगह उठकर एक सफल व्यवसायी बने हैं उससे हर इंसान को को प्रेरणा मिलती है परिस्थिति जो भी हो इंसान के अंदर काबिलियत है तो इंसान कुछ भी कर सकता है।

धीरूभाई अम्बानी की प्रेरणादायी जीवनी
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"यदि आप दृण संकल्प के साथ और पूर्णता के साथ काम करते हैं तो सफलता आपका पीछा करेगी। "

धीरूभाई की बायोग्राफी -
धीरूभाई अम्बानी का जन्म 28  दिसम्बर 1932  को गुजरात के जूनागढ़ जिले के चोरवाड़ गांव  में एक सामान्य मोध बनिया परिवार में हुआ था।  उनके पिता का नाम हीराचंद गोर्धनभाई अम्बानी और माता नाम जमनाबेन था।  इनके पिता एक शिक्षक थे और माँ गृहणी। धीरूभाई के चार भाई - बहन थे। इतने बड़े परिवार का लालन - पालन करना गोर्धनभाई के लिए सरल काम न था।  आर्थिक तंगी के कारण धीरूभाई को हाईस्कूल  में ही पढाई छोड़नी पड गई।  पिता की मदद करने के लिए धीरूभाई ने छोटे - मोटे काम करना शुरू कर दिए।

धीरूभाई की व्यावसायिक सफर की शुरुआत -

धीरूभाई सबसे पहले गिरनार के पास भजिये की दुकान लगाई , जो मुख्यतः यहां आने वाले पर्यटकों पर निर्भर था।  जो साल के कुछ समय तो अच्छा चलता था बाकी समय इसमें कोई खास लाभ नहीं था। इस कारण इस काम में उन्हें सफलता नहीं मिली।  इसके बाद उनके पिता इन्हे नौकरी करने  की सलाह दी।  धीरूभाई के बड़े भाई रमणीक भाई उन दिनों यमन में नौकरी किया करते थे। उनकी मदद से धीरूभाई को भी यमन जाने का मौका मिला।  वहां उन्होंने "ए बेस्सी और कम्पनी " में 300 रूपये प्रति माह के वेतन पर पेट्रोल पंप का काम किया। दो सालों के बाद "ए बेस्सी और कम्पनी " जब 'शेल' नामक कम्पनी  के उत्पादों के वितरक बन गए तब धीरूभाई को एडन बंदरगाह पर कम्पनी के एक फिलिंग स्टेशन में प्रबंधक के पद पर पदोन्नति मिल गई ।

वहीँ   मन में व्यवसाय की बारीकियां जानने को लेकर उत्सुकता पैदा हुई।  उनका मन इसमें कम और व्यवसाय करने के मौके की तरफ ज्यादा रहा। उन्होंने उस हर संभावना पर विचार करने लगे कि किस तरह वे सफल बिज़नेस मैन बन सकते हैं।
धीरूभाई अम्बानी को बिज़नेस का बारीकी सीखने  की इतनी ललक थी कि जब वे शेल कम्पनी में अपनी सेवाएं दे रहे थे। तो वहां काम करने वाले कर्मियों को महज 25 पैसे में मिलती थी , लेकिन धीरूभाई पास ही एक बड़े होटल में चाय पीने जाते थे , जहां चाय के लिए 1 रुपया चुकाना पड़ता था।  जब उनसे इसका कारण पूछा गया तो उन्होंने बताया कि  उस बड़े होटल में बड़े -बड़े व्यापारी आते हैं और बिज़नेस के बारें में बातेँ करते हैं।  उन्हें ही सुनने जाता हूँ ताकि व्यापार की बारीकियों को समझ सकूं।  इस बात से पता चलता है की धीरूभाई अम्बानी को बिज़नेस का कितना जूनून था।
धीरूभाई ने सोच लिया था कि उन्हें अपना कारोबार शुरू करना है इसलिए पैसों के इंतज़ार में लगे रहते थे। उन दिनों यमन में चांदी के सिक्कों का प्रचलन था।  धीरूभाई को एहसास हुआ कि इन सिक्को की चांदी  का मूल्य सिक्कों के मूल्य से ज्यादा है और उन्होंने लन्दन की एक कंपनी को इन सिक्कों को गलाकर आपूर्ति करनी शुरू कर दी।  यमन की सरकार को जब तक इस बात का पता चलता वे मोटा मुनाफा कमा चुके थे। इस तरह की घटनाएं यह साबित करती है कि धीरूभाई की पारखी नजर और अवसर को भुनाने की क्षमता थी।  एक सफल बिजनेस मैन बनने के सारे गुण हैं।

कुछ समय के बाद यमन में आज़ादी के लिए आंदोलन शुरू हो गए , इस कारण  वहां रह रहे भारतीयों के लिए व्यवसाय के सारे दरवाजे बंद कर दिए। जिससे धीरूभाई को भी यमन छोड़ना पड़ा। इस नौकरी के चले जाने के बाद उन्होंने नौकरी की जगह बिज़नेस  करने का निर्णय लिया , लेकिन व्यवसाय शुरू करने के लिए पैसों की जरूरत थी। बिजनेस के लिए पैसे नहीं होने के वजह से अपने चचेरे भाई चम्पकलाल दमानी (जिनके साथ वो यमन में रहते थे ) के साथ मिलकर पॉलिएस्टर धागे और मसालों के आयात - निर्यात का व्यापार प्रारम्भ किया। यहीं पर रिलायंस कमर्शियल कॉरपोरेशन की नींव पड़ी ( मस्जिद बन्दर के नरसिम्हा स्ट्रीट पर एक छोटे से कार्यालय के साथ )। इसके बाद रिलायंस ने सूत के कारोबार में प्रवेश किया। यहां भी सफलता ने धीरूभाई के कदम चूमे और अपनी काबिलियत से जल्दी ही वे बॉम्बे सूत व्यापारी संघ के कर्ता - धर्ता बन गए। यह बिज़नेस जोखिमों से भरा हुआ था और उनके मामा को जोखिम पसंद नहीं था इसलिए जल्दी ही दोनों के रास्ते अलग हो गए , इससे रिलायंस पर कोई खास फर्क नहीं पड़ा।
अब तक धीरूभाई अम्बानी को वस्त्र व्यवसाय की अच्छी समझ हो गयी थी और  1966 में रिलांयस टैक्सटाइल्स नाम से अहमदाबाद के  नैरोडा  में टेक्सटाइल्स मिल की स्थापना की। विमल की ब्रांडिंग इस तरह गई कि जल्दी ही घर -घर में पहचाना जाने लगा और विमल का कपड़ा बड़ा भारतीय नाम बन गया। विमल दरअसल उनके बड़े भाई रमणीक लाल के बेटे का नाम था।

रिलायंस के इस मिल ने पहले साल में ९ करोड़ का कारोबार करके 13 लाख का मुनाफा कमाया।

1980 के दशक में धीरूभाई ने पॉलिएस्टर फिलामेंट यार्न निर्माण का सरकार से लाइसेंस लेने में सफलता हासिल की।

धीरूभाई को इक्विटी कल्ट को भारत में प्रारम्भ करने का श्रेय भी जाता है।

1975 को जब रिलायंस एक छोटी कम्पनी थी , उस समय में भी भारत में 24 कपड़ा मील की जाँच करने के लिए आये हुए विश्व बैंक के एक टीम ने ऐसा कहा था कि विकसित देशों की मीलों से तुलना करने लायक भारत में एकमेव मील ये रिलायंस ही है।

1977 को रिलायंस ने खुद के लिए पहली बार बाजार में शेयर बेच का पैसा खड़ा किया गया। रिलायंस ने जब  आईपीओ जारी किया तब 58000 से ज्यादा निवेशकों ने उसमें निवेश किया। धीरूभाई ने गुजरात और दूसरे राज्यों के ग्रामीण लोगों को आश्वस्त करने में सफल रहे कि जो उनके कंपनी के शेयर खरीदेगा उसे अपने निवेश पर केवल लाभ ही मिलेगा।

धीरूभाई ने रिलायंस के कारोबार का विस्तार विभिन्न क्षेत्रों में किया।  इसमें मुख्य रूप से पेट्रोरसायन , दूरसंचार , सूचना प्रौद्योगिकी , ऊर्जा , बिजली , फुटकर ,कपडा / टेक्सटाइल्स , मूलभूत  सुविधाओं की सेवा , पूंजी बाजार और प्रचालन - तंत्र शामिल हैं।

धीरूभाई की रिलायंस इंडस्ट्रीज में 2012 तक 85000 कर्मचारी हो गए थे और सेन्ट्रल गोवेर्मेंट के पुरे टैक्स में से 5 % रिलायंस देती थी। और 2012 में संपत्ति के हिसाब से विश्व की 500 सबसे अमीर और विशाल कंपनियों में रिलायंस को भी शामिल किया गया था।



निजी जीवन -
धीरूभाई अम्बानी का विवाह कोकिलाबेन के साथ हुआ था और उनके दो बेटे थे मुकेश अम्बानी और अनिल अम्बानी और दो बेटियां नीना कोठारी और दीप्ती सल्गाओकर।

निधन -
दिल का दौरा पड़ने के बाद धीरूभाई को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में  24 जून 2002 को भर्ती कराया गया।  इससे पहले भी उन्हें दिल का दौरा एक बार 1986 में पड़ चूका था , जिससे उनके दाएं हाथ में लकवा मार गया था।  6 जुलाई 2002 को धीरूभाई अम्बानी ने अपनी अंतिम सांसे लीं।

पुरुस्कार  और सम्मान -

  • एशियावीक पत्रिका द्वारा वर्ष 1996 , 1998  और 2000  में पॉवर 50 सबसे शक्तिशाली लोगों की सूचि में शामिल। 
  • 1999 में बिज़नेस इंडिया - बिजनेस मैन ऑफ द ईयर। 
  • 1998 में पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय द्वारा अप्रतीम तेत्रित्व के लिए ' डीन मैडल ' प्रदान किया गया। 
  • भारत में कैमिकल उद्योग के विकास में महत्वपूर्ण योगदान के लिए  'केमटेक फॉउंडेशन एंड कैमिकल इंजीनियरिंग वर्ल्ड ' द्वारा  'मैन ऑफ द सेंचुरी ' सम्मान 2000 . 
  • वर्ष 2001 में ' इकनोमिक टाइम्स अवार्ड्स फॉर कॉर्पोरेट एक्सीलेंस ' के अंतर्गत लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड। 
  • फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ( फिक्की ) द्वारा 'मैन ऑफ 20 th  सेंचुरी' घोषित। 
  • एशियन बिजनेस लीडरशिप फोरम अवार्ड्स 2011 में मरणोपरांत 'एबीएलएफ ग्लोबल एशियन अवार्ड' से सम्मानित।  
धीरूभाई अम्बानी के प्रसिद्ध अनमोल विचार -

  • मुश्किलों में भी अपने लक्ष्यों को ढूंढिए और आपदाओं को अवसरों /मौकों में तब्दील कीजिये। 
  • मेरे भूत , वर्तमान और भविष्य में एक समान पहलू है , सम्बन्ध और आस्था।  ये हमारे विकास की नींव है। 
  • समय सीमा को छू लेना ही ठीक नहीं है , समय सीमा को हरा देना मेरी आशा है/ चाह है। 
  • हम अपने शाशकों को नहीं बदल सकते , पर हम उनके शासन के नियम को बदल सकते हैं। 
  • मेरी सफलता का राज़ मेरी महत्वकांक्षा और अन्य लोगों का मन जानना है। 
  • हमारे सपने हमेशा विशाल होने चाहिए , हमारी ख्वाहिशें हमेशा ऊँची , हमारी आकांक्षाएँ हमेशा ऊँची हमारी प्रतिबद्धता हमेशा गहरी और हमारे प्रयास महान होने चाहिए। 
  • समय उद्यमशीलता जोखिम लेने से ही आता है। 
  • बड़ा सोचों , जल्दी सोचों , आगे सोचों।  विचारों पर किसी का एकाधिकार नहीं है। 
  • फायदा कमाने के लिए न्योते की जरूरत नहीं होती। 
  • यदि आप दृण संकल्प और पूर्णता के साथ काम करेंगे तो सफलता जरूर मिलेगी। 
  • जो सपने देखने की हिम्मत करते हैं , वो पूरी दुनिया को जीत सकते हैं। 
  • हम दुनिया को साबित कर सकते हैं कि  भारत सक्षम राष्ट्र हैं।  हम भारतीयों को प्रतियोगिता से डर नहीं लगता। भारत उपलब्धियां प्राप्त करने वालों का राष्ट्र हैं। 
  • कठिन समय में भी अपने लक्ष्य को मत छोड़िये और विपत्ति को अवसर में बदलिए। 

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