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Sunday, 26 November 2017

दौर की सीख

दौर की सीख 
दौर की सीख

एक 10 साल का बच्चा रोज़ अपने पापा के साथ पहाड़ों पर सैर के लिए जाता था। एक दिन सैर करते समय बच्चे ने कहा कि पापा , आज हम दौड़ लगाते हैं , जो चोटी पर पहले पहुचेंगा वह जीत जायेगा। पापा ने बात मान ली और दौड़ शुरू हो गई। कुछ दूर दौड़ने के बाद पापा अचानक रूक गए। इस पर बच्चे ने पूछा कि आप रुक क्यों गए , क्या आप हार मान ली ? पापा ने कहा कि उनके जुते  में कंकड़ आ गए हैं वह उन्हें निकलने के लिए रुकें हैं। बच्चे ने कहा कि  कंकड़ तो उसके जुते में भी है लेकिन उसके पास उसे निकालने के लिए वक़्त नहीं है। यह कह कर वह आगे बढ़ गया। कंकड़ निकालकर पापा फिर से दौड़ने लगे। कुछ देर बाद बच्चे के पैरों में कंकड़ चुभने लगे , उसे दर्द होने लगा और उसकी स्पीड कम हो गई। धीरे - धीरे पापा उससे आगे निकल गए। तभी वह चिल्लाया कि वह अब नहीं दौड़ सकता। उसके पापा तुरंत उसके पास आए और उसके जूते उतारे तो देखा कि उसके पैरों से खून निकल रहा था।  पापा  घर ले जाकर उसकी मरहम पट्टी की और उसे समझाया कि अगर जिंदगी में कोई समस्या आये तो उसे यह कहकर टालना नहीं चाहिए कि अगर जिंदगी में कोई समस्या आये यो उसे यह कहकर टालना नहीं चाहिए कि  समय नहीं है। यही समस्या आगे जाकर बड़ी हो जाती है और विफलता का कारण बनती है।

               "जो व्यक्ति निश्चय कर सकता है उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं है। "



आप अपना अनुभव हमसे साझा  नीचे  कमेंट्स करके कर सकते हैं। अगर कोई कमी रह गई हो तो बेझिझक बता सकते हैं ताकि हमारे भविष्य के पोस्ट बेहतर हो।  आप किसी के बारे में जानना चाहते हैं तो कमेंट्स  में जरूर बताइये कोशिश करेंगे आप तक पहुचाने की।  आखिर में , अगर आपको ये पोस्ट लाभदायक लगा हो तो अपने दोस्तों के साथ इसे शेयर करना ना भूलें। धन्यवाद। जय हिन्द।  .......

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