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Friday, 3 November 2017

क्या आप भी दुखीं हैंं


क्या आप भी दुखीं हैंं ?



एक बार एक परेशान और निराश व्यक्ति एक महात्मा के पास पंहुचा।  उसने महात्मा को बताया कि वह अपनी ज़िंदगी से बहुत परेशान है। उसके ज़िंदगी में परेशानियों और तनाव के अलावा कुछ भी नहीं है।  उसने  महात्मा से  सही मार्ग दिखाने को कहा।  उस व्यक्ति की पूरी बात सुनकर महात्मा ने उसे बैठाया।  फिर उन्होंने एक गिलास में पानी भरा और उसमे एक मुट्ठी नमक डाल दिया।  महात्मा ने उस व्यक्ति को वह पानी पीने को कहा। जब उस व्यक्ति ने पानी पी  लिया तो महात्मा ने पूछा कि  पानी का स्वाद कैसा था ? व्यक्ति ने जवाब दिया कि बहुत ही ख़राब।  यह सुनकर महात्मा मुस्कुरा दिए।  इसके बाद वह उस व्यक्ति के साथ आश्रम के तालाब के पास पहुंचे।  उन्होंने तालाब के पानी में भी एक मुट्ठी नमक डाला और व्यक्ति से पानी पीने  को कहा।  उस व्यक्ति ने तालाब का पानी पीया और बोला  कि  यह पानी तो मीठा है।  इस पर महात्मा ने उसे समझाया कि जीवन के दुःख भी इस मुट्ठी भर नमक की तरह ही हैं।  यह हम पर निर्भर करता है कि  हम दुखों का कितना स्वाद लेते हैं।  ग्लास की तरह सीमित  रहकर रोज  खारा पानी पीते  हैं या फिर तालाब की तरह बनकर मीठा पानी पीते हैं।
               दोस्तों हम सबकी आदत होती है छोटी सी परेशानी को भी बढ़ा - चढ़ाकर  बताते हैं। यह आप पर निर्भर करता है कि  आप अपने छोटे - छोटे दुखों को भी बड़ा बना देते हैं या बड़े दुखों को भी सकारात्मकता से दूर कर देते हैं।

आप अपना अनुभव हमसे साझा  नीचे  कमेंट्स करके कर सकते हैं। अगर कोई कमी रह गई हो तो बेझिझक बता सकते हैं ताकि हमारे भविष्य के पोस्ट बेहतर हो।  आप किसी के बारे में जानना चाहते हैं तो कमेंट्स  में जरूर बताइये कोशिश करेंगे आप तक पहुचाने की।  आखिर में , अगर आपको ये पोस्ट लाभदायक लगा हो तो अपने दोस्तों के साथ इसे शेयर करना ना भूलें। धन्यवाद। जय हिन्द।  .......

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