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Monday, 2 October 2017

जज्बा कुछ कर दिखाने की

जज्बा कुछ कर दिखाने की 
                दोस्तों अगर आपके पास कुछ कर दिखाने का जज्बा है तो कोई भी बाधा आपका रास्ता नहीं रोक सकती।  ऐसी ही कहानी है फ्रीचार्ज के फाउंडर कुणाल शाह की।  लोगों का फ़ोन रिचार्ज करने का सबसे फेवरेट तरीका फ्रीचार्ज 2010 में कुणाल शाह ने शुरू किया था।  फ्रीचार्ज शुरू करने से पहले कुणाल शाह ने मुंबई के विल्सन कॉलेज से ग्रेजुएशन किया और फिर एमबीए के लिए नरसी मोंजी इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट स्टडीज़ का रूख किया , लेकिन  एमबीए पूरा करने से पहले कॉलेज छोड़ दिया।  दरअसल , उन्होंने घर की आर्थिक हालत ठीक नहीं होने की वजह से पढाई बीच में ही छोड़कर एक स्टार्टअप में जूनियर प्रोग्रामर के रूप में नौकरी करने का फैसला किया।  इसी  स्टार्टअप में काम करते हुए उनकी मुलाकात कंपनी के इन्वेस्टर संदीप टंडन से हुई।  संदीप कुणाल के काम करने के तरीके से इम्प्रेस हो गए। और उन्होंने उन्हें प्रमोट कर दिए।  यहाँ काम करते हुए साल 2009 में उन्होंने पैसाबैक वेबसाइट शुरू की थी , जो रीटेलर्स से ऑनलाइन खरीददारी पर नगदी वापस करने की फेसिलिटी मुहैया करवाती थी।






                   इस वेंचर की शुरूआती सफलता से प्रेरित होकर कुणाल ने 2010 में संदीप को अपना आईडिया बताया , जो उन्हें काफी अच्छा लगा।  उन्होंने कंपनी में इन्वेस्ट किया और इसी तरह फ्रीचार्ज की शुरुआत हुई।  साल 2015 में स्नैपडील ने इसका 400 मिलियन डॉलर के अमाउंट पर अधिग्रहण कर लिया।  कुणाल के दृणनिश्चय  और कुछ अलग करने की कोशिश की बदौलत फ्रीचार्ज ने यह मुकाम हासिल किया। 
              दोस्तों कुछ करने का जूनून हो तो ऐसा ही होता है आपके पास कुछ आईडिया हो तो उसे इम्प्लीमेंट कीजिये लग जाइये उसे सफल बनाने में तो इंतज़ार किस बात की है।  दोस्तों सही समय वही है जब कोई काम को आप स्टार्ट करना चाहते हो और कोई सही समय नहीं होता है इसलिए कुछ भी कीजिये कुछ करते करते आईडिया आता है सोचने से वक़्त गुज़र जाता है तो आज ही अपना आईडिया पर काम करना शुरू कीजिये।  जय हिन्द।  ........   

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