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Friday, 15 September 2017

रिस्क बनाएगी जीरो से हीरो


                
         कुछ साल पहले छुट्टे  पैसे एक बड़ी समस्या थी ! इसी समस्या से निजाद दिलाने के लिए विजय शेखर शर्मा ने 2010 में स्टार्टअप पेटीएम शुरू किया , जिसका पूरा नाम पे थ्रू  मोबाइल है ! पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले के बाद तो इस मोबाइल वॉलेट ब्रांड की पहचान घर-घर में हो गई!
          शर्मा ने बताया था कि  इसके लिए उन्होंने कई मुश्किलें उठाई! एक बार  उनके पास डिनर के लिए पैसे नहीं हुआ करते थे! उनके लिए दो चाय ही काफी हुआ करते थे! 15साल की उम्र में उन्होंने दिल्ली कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग में एडमिशन लिया! समस्या यह थी कि शर्मा को न तो अंग्रेजी बोलनी आती थी और न ही समझ थी! जबकि क्लास में सब अंग्रेजी में पढ़ाया जाता था, ऐसे हालात से परेशान होकर विजय न्र धीरे- धीरे क्लास  में आना बंद कर दिया और डिक्शनरी व पुरानी मैगजीन की मदद से इंग्लिश सीखना शुरू कर दिया! उन्होंने देखा की चाहे ऑटो वाला हो, सब्जी वाला या किराना वाला, सभी जगह उन्हें छुट्टे पैसे के लिए बहुत परेशान होना पड़ता था! यहीं से उनके दिमाग में पेटीएम बनाने का आईडिया आया और आज उनकी कंपनी की मार्किट वैल्यू सभी को पता है! शर्मा की कामयाबी बताती है की जो लोग रिस्क लेते हैं!वही जीवन में कामयाब होते हैं! विफलता की चिंता किये बिना नवाचार करना आपको कामयाबी की ओर ले जाती है !!

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