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Wednesday, 24 January 2018

पैडमैन - सफलता की कहानी

पैडमैन - सफलता की कहानी  

पैडमैन का असली नाम अरुणाचलम मुरुगनंतम है। जिन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। अरुणाचलम मुरुगनंतम ने महिलाओं के लिए पीरियड्स  के दौरान उपयोग किये जाने वाले पैड पर काफी रिसर्च के बाद कम कीमत पर बनाने में सफलता प्राप्त किये। यह पैड पहले से भी मार्केट में उपलब्ध था लेकिन मंहगे होने के कारण अधिकतर गांवों में लोग उपयोग नहीं करते थे , जो  स्वस्थ के दृष्टिकोण से एक बड़ी समस्या थी। यह समस्या का अहसास अनुणाचलम मुरुगनंतम को तब हुआ जब उनकी बीवी को इस समस्या से जूझते हुए देखे और इसका कारण पूछने पर मंहगे होने का पता चला और इसी के साथ पैडमैन का सफर शुरू हुआ इन्ही के वजह से आज अच्छी क़्वालिटी का और कम कीमत पर सैनिटरी पैड उपलब्ध हो पाया , साथ ही लोगो की आजीवका का साधन भी बन गया।


Arunachalam Muruganantham Biography ! अरुणाचलम मुरुगणंतम  बायोग्राफी --

नाम - अरुणाचलम मुरुगनंतम
जन्म - 1962
जन्म स्थान - कोयम्बटूर , तमिलनाडु
माता - पिता  - ए।  वनिता , एस. अरुणाचलम
पत्नी - शान्ति
ऑर्गनाइजेशन - जयश्री इंडस्ट्रीज़
अवार्ड - पद्मश्री

अरुणाचलम मुरुगनंतम का जन्म भारत के तमिलनाडु राज्य के कोयम्बटूर  में सन 1962 में हुआ था।  अरुणाचलम मुरुगनंतम बहुत ही गरीब परिवार में जन्म लिए थे।  जब मुरुगनंतम छोटे थे तभी उनके पिता का सड़क दुर्घटना में निधन हो गया था।  जिसके कारन उनकी माता  ने मजदूरी करके पालन - पोषण किये।  मुरुगनंतम को 14 साल की उम्र में ही स्कूल से निकाल दिया गया था जसिके बाद उन्होंने घर चलाने के लिए कई तरह - तरह की नौकरियां किया।

पैडमैन की शुरुआत --
अरुणाचलम मुरुगनंतम का विवाह शांति नाम की महिला से 1998 में हुई थी। एक दिन अपनी पत्नी को कुछ छुपाकर ले जाते देखा तो उन्हें यह जानने की जिज्ञासा हुई और जब वह बहुत ही ख़राब व गंदे कपड़े देखा। तो मुरुगनंतम समझ गए थे इन कपड़ों का उपयोग पीरियड्स के समय किये थे । वह एक इंटरव्यू में बताये थे इतने गंदे कपडे की मैं अपनी गाड़ी भी उससे साफ़ ना करू इतना गन्दा था। जब अपनी पत्नी से मुरुगनंतम ने पूछा कि मार्केट में मिलने वाले सैनिटरी पैड का इस्तेमाल क्यों नहीं करते तो पता चला की काफी महंगे हैं।

मुरुगनंतम एक दिन मार्केट से सैनिटरी पैड खरीदने गया।  जब पैड को देखा तो उनके अनुमान से प्राइस काफी ज्यादा है। उन्होंने एक पैड घर ले कर चले गए और उन पर रिसर्च करना शुरू कर दिया।

मुरुगनंतम ने ठान लिया था लेकिन सफलता इतने आसानी से मिलने वाली नहीं थी। शुरुआत में सिर्फ पैड बनाने के लिए के लिए मुश्किलों का सामना करना उसमें मटेरियल का स्पेरिमेंट करते रहे। टेस्ट के लिए शुरू में अपने बीवी से सहयोग लिया बाद में उन्होंने ने भी मुँह मोड़ लिया और उनके इस सफर में उनका साथ छोड़ दिया।  फिर मुरुगनंतम ने मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चों का सहयोग लिया कुछ समय के बाद वे भी उनका साथ देने से मना कर दिए। फिर पैड को टेस्ट करने के लिए खुद ने ठान लिया और जानवरों के खून से टेस्ट करने लगे और उसे सायकल के द्वारा भी प्रेशर से टेस्ट करते रहे। इसमें सफलता मिलने के बाद आगे एक और चुनौती उनका इंतज़ार कर रहा था।

सैनिटरी पैड बनाने वाली मशीन की कीमत करोड़ों में थी तो यह एक बहुत ही बड़ी समस्या बन गयी।  लेकिन जिनके ऊपर कुछ करने का जूनून हो उसके लिए ये समस्या छोटी हो गयी और दो सालों तक इसी मशीन के लिए मेहनत करते रहे और सफलता उन्हें आखिरकार मिल ही गई। और कम कीमत पर सैनिटरी नैपकिन बनाने वाली मशीन का अविष्कार कर ही डाला। इसी के साथ जयाश्री इंडस्ट्रीज़ की शुरुआत हुई।

जयाश्री इंडस्ट्रीज़ की स्थापना  Jayaashree Industries 

अरुणांचलम मुरुगनंतम ने सस्ते पैड बनाने वाली मशीन और तकनीक के अपने सुझाव को 2006 में आई आई टी मद्रास के सामने रखा था। जिसके बाद मुरुगनंतम के इस अविष्कार को नेशनल इनोवेशन फॉउंडेशन ग्रासरूट टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन अवार्ड के लिए भेजा गया। हजारों आइडियाज़ में इसका पहला स्थान आया। और यह अवार्ड मिलने के बाद उन्होंने जयाश्री इंडस्ट्रीज की स्थापना किया। जयाश्री इंडस्ट्रीज द्वारा बनाई गई 1300 से ज्यादा मशीनें भारत के 27 राज्यों के अलावा अन्य सात देशों में स्थापित की गई।

मुरुगनंतम के इस अविष्कार को कई कॉर्पोरेट संस्था ने खरीदने की कोशिश की मगर इन्होने इसे बेचने से इंकार कर दिया।

अरुणाचलम मुरुगनंतम भाषण -
अरुणाचलम मुरुगनंतम ने पढाई पूरी नहीं कर पाए लेकिन कई विश्व विख्यात संस्थाओं में भी भाषण दे चुके हैं जिसमें IIM Banglore , IIT Bombay , IIM Ahmedabad और Howard शामिल है।

अरुणाचलम मुरुगनंतम की उपलब्धियां -
अरुणाचलम मुरुगनंतम को भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया है।  मुरुगनंतम टाइम्स ऑफ़ मैगज़ीन द्वारा विश्व के सबसे 100 प्रभावशाली लोगों की सूची में साल 2014 में शामिल किया गया।
मुरुगनंतम की ऊपर कई डॉक्यूमेंट्री भी बनाई गयी है। जिनमें से एक फिल्म 9 फ़रवरी 2018 को सिनेमा घर में देखने को मिलेगा जिसमें पैडमैन के रूप में मुरुगनंतम के रूप में अक्षय कुमार दिखेंगे। 

अरुणाचलम मुरुगनंतम के जीवन पर बन रही फिल्म 
अरुणाचलम मुरुगनंतम की जीवन आसान नहीं था किस तरह गरीब घर में पैदा हुआ और छोटी सी उम्र में स्कूल से निकाल दिया गया।  शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाने के बावजूद भी आज सफलता के शिखर पर बैठे हैं। उन्ही सारी मुश्किलों को एक फिल्म  जरिये आप तक पहुंचाने  के लिए आज फिल्म का सहारा लिया  हैं।  आपसे अनुरोध है। आप भी इनकी फिल्म देखिये और जिंदगी में आगे बढिये। सफलता आपका इंतेज़ार कर रहें हैं।

अन्य पॉपुलर पोस्ट --

अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलें


आप अपना अनुभव हमसे साझा  नीचे  कमेंट्स करके कर सकते हैं। अगर कोई कमी रह गई हो तो बेझिझक बता सकते हैं ताकि हमारे भविष्य के पोस्ट बेहतर हो।  आप किसी के बारे में जानना चाहते हैं तो कमेंट्स  में जरूर बताइये कोशिश करेंगे आप तक पहुचाने की।  आखिर में , अगर आपको ये पोस्ट लाभदायक लगा हो तो अपने दोस्तों के साथ इसे शेयर करना ना भूलें। धन्यवाद। जय हिन्द।  ......

Sunday, 14 January 2018

हाथी का मनोबल

इंसान के अंदर बहुत सी शक्तियां हैं जिसका उपयोग इंसान नहीं करता सिर्फ कुछ ही प्रतिशत उसका उपयोग करते हैं लेकिन इंसान अपने मनोबल और जोश के साथ काम करेंगे तो जो चाहे प्राप्त कर सकते हैं। आइये एक एक कहानी  के साथ समझते हैं -


हाथी का मनोबल


एक राजा के पास बहुत ही शक्तिशाली हाथी था। उस हाथी की मदद से राजा ने कई युद्ध जीते थे लेकिन समय के साथ - साथ हाथी  बुद्धा होता जा रहा था।  ऐसे में उसकी ताकत भी कम हो गई थी। धीरे - धीरे राजा ने उसे युद्ध पर ले जाना बंद कर दिया और इसका कारण उसका खाना - पीना भी पहले से कम कर दिया गया। एक दिन हाथी बहुत प्यासा था।  वह अपनी प्यास बुझाने के लिए महल के पास वाली झील पर गया और खूब पानी पिया। इसके बाद वह नहाने के लिए गहरे पानी में उतरने लगा लेकिन वहां कीचड़ होने के कारण वह पानी में फंस गया।  जब यह बात राजा को पता लगी तो उसने सैनिकों को उसे निकालने भेजा लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी हाथी को निकाला नहीं जा सका। ऐसे में राजा चिंतित हो गया।  तभी उसके मंत्री ने उसे एक सुझाव दिया। सभी सैनिकों को युद्ध के कपड़े पहनाए गए और हाथी के तरफ बढ़ने के लिए कहा गया। युद्ध भूमि जैसे नगाड़े भी बजने लगे। हाथी को लगा कि दुश्मन सेना उसकी ओर बढ़ रही है। यह सब देख हाथी का सोया हुआ मनोबल जाग उठा और वह पुरे जोश के साथ आगे बढ़ा। देखते ही देखते वह पानी से बाहर आ गया और राजा के मंत्री द्वारा बताई गई तरकीब काम कर गई।

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Friday, 12 January 2018

स्वामी विवेकानंद जी के अनमोल विचार


स्वामी विवेकानन्द जी हमेशा सभी वर्गों के लिए प्रेरणा स्रोत रहें हैं इनके में  विचारों में  इतनी शक्ति है कि  मुर्दो में भी जान डाल देती है। स्वामी जी कहते हैं मनुष्य अपने भाग्य का विधाता खुद हैं असीम शक्तियां है कुछ भी कर सकते हैं लेकिन कई लोग भाग्य का रोना रोते बैठ जाते हैं। आप अपने भाग्य खुद लिख सकते हैं।  
स्वामी विवेकानंद जी के अनमोल विचार

जिस समय जिस काम के लिए प्रतिज्ञा करो , ठीक उसी समय पर उसे करना चाहिए , नहीं तो लोगों का विश्वास उठ जाता है। 

आप अपने लक्ष्य को अपनी काबिलियत के स्तर से नीचे न रखे , बल्कि अपने काबिलियत के स्तर को अपने लक्ष्य के जितना बड़ा बनाने की कोशिश करें। 


अच्छा होगा कि  आप कोशिश करें और नाकामयाब हो जाएँ और उससे कुछ सीखें बजाये इसके की आप कुछ करें ही नहीं। 


संभव की सीमा जानने का केवल एक ही तरीका है असंभव से भी आगे निकल जाना। 


पहले हर अच्छी बात का मजाक बनता है , फिर विरोध होता है और फिर उसे स्वीकार कर लिया जाता है। 


किसी मकसद के लिए खड़े हो तो एक पेड़ की तरह , गिरो तो एक बीज की तरह , ताकि दुबारा उगकर उसी 

मकसद के लिए फिर से जंग कर सको। 

एक अच्छे चरित्र का निर्माण हजारों ठोकरें खाने के बाद ही होता है। 


सच्चाई के लिए कुछ भी छोड़ देना चाहिए , पर किसी के लिए भी सच्चाई 

नहीं छोड़ना। 

एक समय आता है , जब मनुष्य अनुभव करता है कि थोड़ी - सी मनुष्य की सेवा करना लाखों जप - ध्यान से कहीं बढ़कर है। 


महानता त्याग करने से ही आती है। 

जिस दिन आपके सामने कोई समस्या न आये, आप यकीन कर सकते हैं कि आप गलत रास्ते पर सफर कर रहे हैं। 
बस वही जीते हैं जो दूसरों के लिए जीते हैं। 

जब तक आप खुद पे विश्वास नहीं करते तब तक आप भगवान पे विश्वास नहीं कर सकते। 


आपकी शक्ति ही आपकी जिंदगी है और कमजोरी आपकी मृत्यु। 


उठो ! जागो ! और जब तक नहीं रुकना तब तक लक्ष्य प्राप्त ना हो जाये। 


सभी शक्तियां आपके अंदर हैं आप सब कुछ और कुछ भी कर सकते हैं। 


जिंदगी में जोखिम उठाना जरूरी है।  जीतने पर आप नेतृत्व कर सकते हैं , हारने की सूरत में दूसरों को दिशा दिखा सकते हैं। 


विश्व एक व्यायाम
शाला है जहाँ हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं। 

जब तक जीना , तब तक सीखना अनुभव ही जगत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक है।  

किसी एक विचार को अपने जीवन का लक्ष्य बनाओ कुविचारों का त्याग कर केवल उसी विचार के बारे में सोचो तुम पाओगे कि सफलता तुम्हारे कदम चुम रही है। 


लगातार पवित्र विचार करते रहें , बुरे संस्कारों को दबाने के लिए एक मात्र समाधान यही है। 


स्वयं में बहुत सी कमियों के बावजूद अगर मैं स्वयं से प्रेम कर सकता हूँ तो फिर दूसरों में थोड़ी बहुत कमियों की वजह से उनसे घृणा कैसे कर सकता हूँ। 


खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है। 


मनुष्य स्वयं अपने भाग्य का निर्माता है। 


सबसे बड़ा धर्म है अपने स्वभाव के प्रति सच्चे होना। स्वयं पर विश्वास करो। 


आप जैसे विचार करेंगे , वैसे आप हो  जायेंगे अगर अपने आपको निर्बल मानेंगे तो आप निर्बल बन जायेंगे और यदि जो आप अपने आपको समर्थ मानेंगे तो आप समर्थ बन जायेंगे। 


जीवन में ज्यादा रिश्ते होना जरूरी नहीं है पर जो रिश्ते हैं उनमें जीवन होना जरुरी है। 

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युवा दिवस - स्वामी विवेकानंद

 स्वामी विवेकानंद के विचार ऐसे हैं कि निराश व्यक्ति भी अगर उसे पढ़े तो उसे जीवन जीने का एक नया मकसद मिल सकता है। विवेकानंद जी कहते हैं अगर आप जिंदगी में रिस्क लेते हैं तो आप जीत कर आगे बढ़ जायेंगे और अगर हार जाते हैं तो आप लोगो को गाइड कर सकते हैं।

आज 12 जनवरी स्वामी विवेकानंद जी का जन्म दिवस है और आज के दिन को युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। युवा वर्ग हो या किसी भी वर्ग के लिए विवेकानंद हमेशा मार्गदर्शक के रूप में ही रहेंगे। उनके विचारों से आज कोई भी अछूता नहीं होगा हर कोई उनके विचारों के भक्त हैं।

                              "उठो , जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य ना प्राप्त हो जाये"

                                             "Strength is Life Weakness is Death"





निडरता --  स्वामी विवेकानंद जी कहते हैं  कि हरेक इंसान की मृत्यु एक ही बार होती है इसलिए उनका मानना था कि हरेक इंसान का जन्म कुछ न कुछ करने के लिए होता है तो बिना डरे कुछ न कुछ कीजिये बैठे न रहे। मेहनत के दम पर कुछ करके जरूर दिखाइए। किस्मत के भरोसे न बैठो।

स्वार्थी नहीं बनना -- स्वार्थी नहीं बनना बल्कि सेवक बनिए। कुछ करना है तो स्वार्थ को आपको त्यागना पड़ेगा तभी आप कुछ कर पाएंगे। अगर आप सिर्फ अपने लिए सोचेंगे तो आप कभी भी आगे नहीं बढ़ पाएंगे। इसलिए कुछ भी करना है आगे बढ़ना है तो स्वार्थ को त्याग कर आगे बढ़ो सफलता जरूर मिलेगी।

आत्मशक्ति -- अपने आत्मशक्ति को पहचानिये।  अपने आत्मशक्ति को पहचान लिए तो आप कुछ भी कर सकते हैं। इंसान के अंदर बहुत शक्ति है इंसान कुछ भी कर सकता है बस खुद के अंदर के शक्ति को पहचानना है। जो इंसान अपने आत्मशक्ति को पहचान लिया वो कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा आज वही ज सफल हैं।

खुद पर विश्वास -- स्वामी विकेकानंद जी कहते हैं अगर जिंदगी में कुछ करना है तो खुद पर विश्वास करना चाहिए क्योंकि  इसके बिना कुछ नहीं किया जा सकता। आज के समय में  नास्तिक वो नहीं है जो भगवान पर विश्वाश नहीं करता बल्कि नास्तिक वो है जो खुद पर विश्वास नहीं करता। ऐसे लोग कुछ खास नहीं कर पाते। सफलता पाना है तो खुद पर विश्वास कीजिये और मजबूत इरादों के साथ मेहनत कीजिये सफलता जरूर मिलेगी।

अपने आप को ताकतवर बनाना -- आपको पहले मजबूत बनना होगा शारीरिक रूप से और मानसिक रूप से भी तभी आप कुछ कर पाएंगे। ताकि मजबूत संकल्प के साथ कुछ भी कर सके। ये दोनों में किसी भी चीज़ की कमी हुई तो आपको आगे बढ़ने में मुश्किल होगी इसलिए ये दोनों आपको सफल होने के लिए जरूरी है।

खुद को कमजोर -- खुद को कमजोर समझने लगे तो आप जिंदगी में कुछ नहीं कर पाएंगे। आपके अंदर असीम शक्ति है बस उसे महसूस कीजिये उसे जानने की जरूरत है। अपने हुनर अपने मकसद को तलाशो खुद को कमजोर समझकर वक़्त को ख़राब ना करो। मेरे अंदर असीम शक्ति है और इसे मैं कर सकता हूँ बस इतना ठान लीजिये और लग जाइये अपने लक्ष्य को पाने के लिए।

सयंम -- अगर आप कुछ भी कर रहे हैं तो सबसे पहले कुछ करने के लिए अपने अंदर एक क़्वालिटी होना जरूरी होता है वो है सयंम। किसी भी कार्य को करने जा रहें हैं तो उसका फल जरूरी नहीं है की तुरंत ही आपको मिल जाये खासकर सफलता उसके लिए सयंम जरूरी है। किसी भी क्षेत्र में आपको सयंम के साथ काम करना होगा।

कभी भी हार नहीं मानना -- जिंदगी में कभी हार नहीं मानना चाहिए कोशिश करते रहना चाहिए जीतने भी सफल हुए हैं उनको एक बार में सफलता हाथ नहीं लगी है कितने कोशिशों के बाद उनको सफलता मिली है। अपने काम पर फोकस कीजिये और लग जाइये जूनून के साथ और सफल होकर ही दम लीजिये।

अपने पैरों पर खड़े रहना -- "खड़े हो जाओ साहसी बनो और शक्तिमान  बनो "  स्वामी जी लोगों को हमेशा मोटिवेट किए हैं।  आप इंतज़ार न कीजिये न किस्मत के भरोसे बैठिये नहीं तो जो सफल लोग छोड़ दिए हैं वही आपके हाथ आएगा। लेकिन कुछ कर दिखाना है तो उनसे एक कदम आगे चलना होगा या उनके साथ तभी आप सफल हो पाएंगे। इसलिए साहसी बनो हार नहीं मानना सफलता आपके कदम जरूर चूमेगी।

दोस्तों आज युवा दिवस की शुभकामनायें के साथ आज से ठान लीजिये कुछ करके दिखाना है। अपना खुद का वजूद बनाना है अपना लक्ष्य बनाइये और नए वर्ष के साथ लक्ष्य बना लिए हैं तो अब लेट ना करें बस अपने मंजिल की ओर आगे बढिये हमेशा खुद को मोटिवेट रखिये और लगे रहिये आपको जरूर सफलता मिलेगी। मेरे तरफ से शुभकामनायें।

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Monday, 8 January 2018

अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलें

कई उलझनों में फंसकर जीवन का असल उद्देश्य दिखाई ही नहीं पड़ता। आपाधापी आत्मवलोकन के अवसर ही नहीं देती। पर कुछ घटनाएं जीवन बदलने की ताकत जरूर रखती है।

अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलें


सर्कस का एक शेर था , जिसका नाम बब्बर था।  मालिक के हंटर के इशारे पर नाचता था। क्योंकि बचपन से ही भय उसके दिमाग में बैठा दिया गया था।  सभी इंसान उसके खेल को निर्भय होकर देखते थे। बब्बर ने कभी शिकार ही नहीं किया था इसलिए उसे अपनी शक्तियां मालूम ही नहीं थी।  उसे पता ही नहीं था कि जंगल में मालिक तो क्या, उसका तमाशा बना रहे दर्शक भी भयभीत होकर भाग जाएंगे। 
किसी ने गब्बर के कान में कहा कि तुम्हारी जगह सर्कस में नहीं है , तुम्हारा इलाका जंगल है। तुम बहुत शक्तिशाली हो , इसका अनुभव तुम्हें  जंगल में पहुंचकर होगा।  बब्बर सोचने लगा कि थोड़े काम के बदले यहाँ मुझे खाना मिलता है।  जंगल में खाना कहाँ से आएगा ? यही सोचकर बब्बर ने जंगल जाने का इरादा बदल दिया। 

बब्बर के किसी शुभचिंतक ने बताया कि बचपन में जिन माता - पिता से वह बिछड़ गया था, वो जंगल में ही मिलेंगे।  यह सुनते ही बब्बर ने जंगल जाने की योजना बना ली और जंगल पहुंच गया। वह भूखा रहने लगा क्योंकि वह शिकार कर ही नहीं पाता था और सर्कस की तरह उसे खाना परोसने वाला कोई नहीं था।  वह अन्य पशुओं को शिकार करते हुए भी देखता था , परन्तु उसमें खुद शिकार करने की हिम्मत नहीं हुई। उसकी मुलाकात उसके माता - पिता से हुई।  माता - पिता उसकी हालत देखकर सबकुछ समझ गए और उसे  शिकार करके अपना भोजन जुटाने के लिए प्रोत्साहित किया।  शिकार के पीछे भागते हुए वह एक गांव के निकट पहुंच गया और शिकार को पकड़ लिया।  तभी उसे गांव में इंसान दिखाई दिए और उसका डर लौट आया। तभी उसने देखा कि उल्टे इंसान उससे डर रहे हैं।  आज पहली बार वह निर्भीक महसूस कर रहा था।  खुद भोजन जुटाकर आत्मनिर्भर भी। उसे अहसास हो गया था कि उसकी सही जगह कौन -सी है। 


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Sunday, 31 December 2017

जिंदगी संवारने का मौका देता है नया साल

जिंदगी संवारने का मौका देता है नया साल

इस साल नव वर्ष पर कुछ नया करने की ठानें और नव निर्माण करें।  नए साल को कुछ  तरह से जिए कि हर दिन जिंदादिली की मिसाल बन जाये।

यह तो तय है कि यह साल हम सबकी जिंदगी को नए अनुभव देकर जा रहा है।  फर्क सिर्फ इतना है कि इन सब अनुभवों को देखने का हमारा नजरिया कैसा है।  यह नजरिया ही तय करेगा कि आने वाला साल कैसा होगा , क्योंकि यह सिर्फ हम तय कर सकते हैं कि आने वाले साल को बाकी बीते हुए सालों की तरह बिताया जाये या फिर ऐसे कि पूरी जिंदगी इसमें समा जाये .......



जिंदगी संवारने का मौका देता है नया साल


 क्या आप चाहते हैं ? हमें पूरा विश्वास है कि दूसरा वाला विकल्प चुनेगें। हम सब नव वर्ष को एक उत्सव की तरह मनाते हैं।  पार्टी , मौज - मस्ती , घूमना इन सबसे हटकर भी कुछ ऐसा है, जो हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है।  नव वर्ष अपनी जिंदगी की कहानी को बदलने का श्रेष्ठ समय है। यह याद दिलाता है कि गत वर्ष हमारी ज़िंदगी हमारी आशा के अनुसार नहीं रही तो यह मौका है कि  हम इस कहानी में अपने अनुसार बदलाव करें।  तो फिर तैयार हो जाइये ......... अपनी ज़िंदगी को रोचक बनाने के लिए --


मकसद हो इस साल -- उम्र को हराना है तो शौक पालना सीखा लें।  यह वाक्य बहुत ही अर्थपूर्ण है।  जी हाँ।  यदि हमें अपने आपको उत्साही , ऊर्जावान और प्रेरित रखना है तो कुछ लक्ष्य बनाने ही होंगे।  हमें तय करना है कि इस साल में इन पांच मुख्य लक्ष्यों को प्राप्त करेंगे और हाँ इन्हें लिखना ना भूलें।  याद रखें कि यह लक्ष्य हमारी जिंदगी के उन क्षेत्रों से होंगे , जहाँ हमें सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है - स्वास्थ्य , करियर , व्यापार , रिश्ते आदि।

अपने डर को चुनौती दें --अपने तीन बड़े डर जो कि  हमें अब तक रोकते आए हैं उनको लिखना है और एक के बाद एक उन पर काम करना है।  परिणाम चाहे जो भी हो , रूकना नहीं है।  अब चाहे वह डर कुछ सीखने का हो , नया काम करने का हो , पब्लिक स्पीकिंग का हो या कुछ और इस साल तो उस पर काम करना ही है। 

जिम्मेदारी लें --  इस बार नव वर्ष पर बहुत सारे वायदे करने की अपेक्षा पांच जिम्मेदारी लें। मैं अपनी जिंदगी में आने वाले साल में ये पांच जिम्मेदारी पूर्ण करूंगा ताकि मैं अपने जीवन को श्रेष्ठता की ओर ले जा सकूं। ये जिम्मेदारियां व्यवहार में या अपने व्यापार में हो सकती है।

स्वयं को महसूस करें --  यह एक ऐसा अभ्यास है जो हमें आत्मविश्वास देगा और स्थिर रहना सिखाएगा।  इस साल अपने साथ समय बिताना शुरू करें , सुबह जल्दी उठकर कुछ समय मौन रहना , अपने विचारों को लिखना , ध्यान लगाना और सुबह भ्रमण पर जाना , व्यापार करना , किसी शाम अकेले घूमने निकल जाना और कभी - कभी अकेले ही यात्रा पर निकल जाना।  इन सबसे आप अपने आप को और जान सकेंगे और जितना आप खुद को जानते जायेंगे , उतना ही आप हर्ष और उत्साह से भरते जायेंगे। 

अपना नव निर्माण करें -- बीता हुआ साल सिर्फ अनुभवों का जोड़ और हमारे चुनावों का परिणाम था , अंतिम सत्य नहीं। आने वाले साल में हम किस तरह के अनुभवों को जोड़ना चाहते हैं , यह चुनाव करने का हमारे पास समय और विकल्प है।  यह हमारे चुनावों की ही ताकत है कि हम अपने आपको जब चाहें तब बदल सकते हैं।  बदलाव बाद में पूर्ण होता है , लेकिन प्रारंभ कुछ ही सेकंड में हो जाता हैं।  इससे आगे एक के बाद एक नए अनुभव जुड़कर हमें पूर्ण रूप से बदल देते हैं।



उत्साह का स्रोत बनें -- एक शोध के अनुसार यदि हम दिन में चार सकारात्मक बातें और एक नकारात्मक बात करते हैं तो हम ख़ुशी वाली अवस्था में हैं।  लेकिन आधुनिक समय में इसकी बहुत कमी है।  इसलिए लोगों की प्रशंसा करने के मौके न छोड़ें।  इसकी शुरुआत स्वयं और अपने परिवार से करें। लोगों से बात करते वक़्त उत्साह और मुस्कान के साथ बात करें और इसे अपनी आदत बनाये। साल के अंत में आप देखेंगे कि बहुत सारे लोग आपके दीवाने हैं।

अपनी ख़ास पहचान बनाए --लोगों को यह तय मत करने दो कि आप क्या कर सकते हैं। यह हक़ केवल आपका है।  अपनी विशेषता को पहचानें , अपनी उन बातों पर गौर करें , जो आप सबसे अलग करते हैं या बहुत अच्छे से करते हैं।  अपनी उन दक्षताओं पर ध्यान दें , जो आप अच्छे से अभ्यास कर सकते हैं , अपने उस शौक पर काम करें , जो आपको आनंद देता हो।  निश्चित रूप से यह साल आपको भीड़ से अलग कर देगा और ख़ास बनाएगा।

अनुभवों से सीखें --  बीता  हुआ साल हमारी जिंदगी में कुछ अनुभव जोड़कर जा रहा है।  यदि इनसे सीख लिया जाये तो ये अनुभव हमारे श्रेष्ठ टीचर हो सकते हैं और ऐसा करने के लिए हमें स्वयं से दो सवाल करने हैं।  पहला - इस साल से मैंने क्या पांच महत्वपूर्ण सीखें ली हैं ? दूसरा - इन सीखों को आने वाले साल में कैसे उपयोग में लाना है ? इन दोनों सवालों के जवाब हमें लिखने हैं ताकि हमारे आने वाले साल में इन महत्वपूर्ण बातों का हम सही से ध्यान रख पाएं।

ज्ञान का भंवरा न बनें -- भंवरा सिर्फ फूलों से मधु का पान करता है देता कुछ नहीं है।  वहीँ , मधुमक्खी उसी मधु को दूसरों के लिए छोड़ देती है।  कुछ नया पढ़ें , कुछ पुराना पढ़ें , पर इस साल कुछ इस तरह पढ़ना है कि यह पढ़ा - लिखा काम आये......खुद सीखें और दूसरों को भी सिखाएं।  याद रखें कि हमें अपने ज्ञान और अनुभव को दूसरे लोगों के साथ शेयर करना है।

पॉपुलर पोस्ट --

खुद पर करेंगे भरोसा , तभी मिलेगी सफलता

लक्ष्य के लिए उत्साह जरूरी है


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Wednesday, 20 December 2017

खुद पर करेंगे भरोसा , तभी मिलेगी सफलता

खुद पर करेंगे भरोसा , तभी मिलेगी सफलता 

अगर आप जीवन में सफलता प्राप्त करना चाहते हैं तो आपको खुद पर भरोसा करना होगा। खुद पर यकीन नहीं होगा तो आप कोई भी कार्य पूरा नहीं कर पाएंगे। 
अगर आपके जीवन में एक सपना है और उसे पूरा करना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको अपने ऊपर विश्वास करना होगा। खुद को यकींन दिलाना होगा कि  आप अपने सपनों को साकार करने के लिए काबिल हो।  आपको अपने अंदर यह विश्वास होना चाहिए कि  अपने अंदर मंजिल पाने की काबिलियत है।  यह आत्मविश्वास आपके अंदर कूट - कूटकर भरा होना चाहिए कि  मैं इस काम को कर सकता हूँ।  आपको अपनी क्षमताओं पर भरोसा करना होगा।
खुद पर करेंगे भरोसा , तभी मिलेगी सफलता

'मैं नहीं कर सकता ' छोड़ दें --

अगर आपको सफल होना है तो 'मैं नहीं कर सकता ' के विचार को अपने अंदर से निकाल फेंकना होगा। इस तरह के विचार से हम काम करने से पहले ही खुद को कमजोर मानने लगते हैं और हम काम की शुरुआत ही नहीं करते। अगर सफल होना है तो ' काश ' मैं इसे कर पाता ' जैसे शब्द हमें अपनी जिंदगी से निकाल फेंकने होंगे।  प्रण कर लें कि  मैं इस काम को तब तक करूंगा , जब तक कि मैं इस काम में सफल नहीं हो जाता।

हार नहीं माननी है --

एक छोटा बच्चा बचपन में बार - बार खड़ा होने की कोशिश करता है।  वह बार -बार गिरता है लेकिन वह फिर से खड़ा होने की कोशिश करता है और वह अपने अंदर के विश्वास और प्रयास से एक दिन खड़ा हो ही जाता है आपको भी हार नहीं माननी है।  सपनों  का पीछा करना है।  हर हार को एक सबक की तरह लेना है।  तभी जिंदगी में कुछ बड़ा पा सकते हैं।

काम की शुरुआत करें --

जब आप किसी काम को शुरू कर देते हैं तो आधी जंग जीत जाते हैं।  शुरुआत ही सफलता का मंत्र होता है।  ज्यादातर लोग तो जीवन में कुछ बड़ा करने की सपना ही देखते रह जाते हैं जबकि सफलता प्राप्त करने वाला एक बार शुरुआत करता है।  हो सकता है कि वह हर जाये , पर वह हिम्मत दिखाता है।  यह सब इसलिए होता है , क्योंकि वह खुद पर भरोसा करता है।  इसलिए आप भी अपने ऊपर विश्वास करके मंजिल की ओर कदम बढ़ाना शुरू कर दें।  अपने समय को ख़राब न करें , क्योंकि जो समय निकल जाता है वह दुबारा लौटकर नहीं आता।

क्षमताओं पर शक न करें --

आपको हर परिस्थिति में खुद पर भरोसा करना होगा।  दुनिया आपको रास्ता बदलने के लिए कहेगी।  मन कहेगा मैं  कुछ और कर लेता हूँ , पर दृण विश्वास आपको टिकाये रखेगा।  कई बार दूसरों की सफलता को देखकर या अपने आपको दूसरों से कम आंककर विश्वास डगमगाने लगता है।  यह सब इसलिए होता है क्योंकि हमें बचपन से ही सिखाया जाता है कि जीवन में काफी संघर्ष है , कोई भी चीज़ आसानी से नहीं मिलती है।  इन विचारों के कारण हम अपनी क्षमताओं पर शक करना सीख जातें हैं ओर सपनों को पूरा नहीं कर पाते हैं।

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Sunday, 17 December 2017

एक घंटे की कीमत

                                     एक घंटे की कीमत

आज जिंदगी में हर किसी को पैसों की जरूरत है और उसे कमाने के लिए अपना पूरा समय बीता देते हैं। पैसा तो आप सारी ज़िंदगी कमाएंगे लेकिन समय बीता हुआ वापस नहीं आएगा। इसलिए पैसे से भी ज्यादा मूल्यवान चीज़ है तो वो है समय।

         पैसे कमाने के लिए इतना व्यस्त ना हो कि  परिवार के लिए समय ही ना मिले। 

एक घंटे की कीमत


एक बार एक व्यक्ति ऑफिस से थका हुआ घर आया।  वहां उसने देखा कि उसका आठ साल का बेटा उसका इंतेज़ार कर रहा था।  उसे देखते ही बेटे ने पूछा कि  पापा , क्या मैं आपसे एक सवाल पूछ सकता हूँ ?
व्यक्ति के हाँ कहने पर उसके बेटे ने उससे पूछा कि आप एक घण्टे में कितना पैसा कमाते हैं ? यह सुनते ही वह व्यक्ति गुस्सा हो गया और बेटे को डांटने लगा। बेटे ने कहा कि वह बस जानना चाहता है।  इस पर व्यक्ति ने कहा कि करीब 100 रूपये।  फिर बेटे ने पूछा कि  क्या आप मुझे 50 रूपये दे सकते हैं ? इस पर उस व्यक्ति का गुस्सा बहुत बढ़ गया और उसने अपने बेटे को डांटते हुए कमरे में जाने को कहा। बेटा रोटा हुआ कमरे में चला गया।  थोड़ी देर बाद जब उस व्यक्ति का गुस्सा शांत हुआ तो वह अपने बेटे के कमरे में गया और उससे माफ़ी मांगते हुए उसे 50 रूपये दे दिए।  बेटा बहुत खुश हुआ और तुरंत अपनी गुल्लक से पैसे निकालकर गिनने लगा। उस व्यक्ति ने बेटे से पूछा कि जब तुम्हारे पास पैसे थे तो तुमने मुझसे क्यों मांगे ? आखिर तुम्हें क्या खरीदना है ? इस पर बेटे ने कहा कि  मेरे पास पैसे कम थे।  यह लीजिए 100 रूपये।  क्या आप मुझे कल अपना एक घण्टा  दे सकते हैं ? मैं आपके साथ बैठकर खाना खाना चाहता हूँ।

आज मैं भी अपना समय पैसे से ज्यादा महत्व देता हूँ।  आपसे भी उम्मीद करता हूँ परिवार ही नहीं होगा तो आप पैसों को क्या कर लोगो इसलिए अपको  भी परिवार को  महत्व देना चाहिए।

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